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Tuesday, 31 August 2021
BMS BLOG: मेरे पड़ोस में
BMS BLOG: मेरे पड़ोस में: मेरे पड़ोस में एक मकान छोड़ कर दूसरे मकान में मुहम्मद अली उस्बेक का मकान है मुहल्ले में मेरे कई कौमों के कई मकान हैं अली की मुहल्ले में एक ...
Saturday, 25 February 2017
कविता
इश्क्शुदा
लोग कहते हैं ये रोग बुरा है
एक आशिक ज़माने से जुदा है
मुहब्बत पर जो फ़िदा हुआ
ज़माने में फिर वो किसका हुआ है
समझाया बहुतों ने
मगर हम ने एक न मानी
तेरी निगाहों के एक वार पर
दिल की बाज़ी लगा दी
तुम मुस्कुरा कर देखतीं ए-मुहब्बत हमें
उससे पहले ही दिल की वसीहत कर डाली
लोग जब होते हैं शादीशुदा
तब कहते हैं कसमें
हमने तो इश्क्शुदा होकर ही
सारी कस्म-ए-रस्म निभा डाली
Sunday, 26 June 2016
Sunday, 8 May 2016
Friday, 6 May 2016
LADKIAN
LADKIAN
- Chidiya hoti hain ladkian, Fir bhi udd nahi pati hain ladkian .
- Lakshmi hoti hain ladkian, Fir bhi ek ek paise ke liye mohtaj ho jaati hain ladkian.
- Mayke waale kehte hain beti tu parai hain, Saas kehti ki tu parai ghar se aayi hain.
- He khuda ab tu hi bata akhir tune ye betian kis ghar ke liye banai hain.
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