Sunday, 10 May 2015

मैं बोझ नहीं हूँ ......




शाम हो गई अब तो घूमने चलो ना पापा
चलते चलते थक गई हूँ कंधे पर बिठा लो ना पापा
अँधेरे से डर लगता है , सीने से लगा लो ना पापा

मम्मी तो सो गई , आप ही लोरी सुना कर सुला दो ना पापा
स्कूल तो पूरा हो गया , अब तो कालेज जाने दो ना पापा
पाल पोस कर बड़ा किया ,अब जुदा तो मत करो ना पापा

अब डोली में बिठा ही दिया तो
आंसू  तो मत बहाओ ना पापा
आपकी मुस्कराहट अच्छी है , एक बार मुस्कुराओ ना पापा

आप ने तो मेरी हर बात मानी है , एक बात और मान जाओ ना पापा
इस धरती पर बोझ नहीं हूँ मैं
इस दुनिया को समझाओ ना पापा



-----पुलकित सांघी

बी जे एम सी  प्रथम  वर्ष 

1 comment:

  1. यह कविता मेरी है भाई शर्म करो थोड़ी
    http://abhayasibapu.blogspot.in/

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