डेढ़ वर्ष पहले जब उत्तर प्रदेश की सत्ता में समाजवादी पार्टी लौटी तो कुछ आशा जगी थी। 15 मार्च 2012 को मुलायम सिंह यादव के स्थान पर उनके पुत्र अखिलेश यादव को उत्तरप्रदेश की कमान सौंपी गयी। सरकार को इस बार स्पष्ट बहुमत भी मिला था लेकिन 18 महीने के शासन के बाद भी सरकार जनता की उम्मीदो पर खरी नही उतर पार्इ। वही अखिलेश यादव भी लोगों का विश्वास जीतने में भी नाकाम रहे है।
एक मस्जिद की बन रही अभेद दीवार को कथित तौर पर गिरा देने की अपुष्ट खबर मिली। उससे सांप्रदायिक माहौल खराब हो जाने की वजह से 45 मिनट में दुर्गा शक्ति नागपाल को निलंबित कर दिया। वही अखिलेश यादव की सरकार ने 15 दिन तक मुजफ्फरनगर में बढ़ रहे हिंसा के सांप्रदायिक तनाव की अनदेखी करते रहे और चारो तरफ से अखिलेश यादव की सरकार सवालो के घेरे में है।
प्रदेश में सांप्रदायिक घटनाएं होने लगी जिसने लोगो को हिला कर रख दिया। सांप्रदायिक घटनाएं प्रदेश में पिछले कर्इ वर्षो से नही हो पा रही थी वही अब शुरू होने लगी है। उत्तर प्रदेश में अभी तक सरकार के दिए हुए आंकड़े की ही बात करे तो मार्च 2012 में दिसंबर तक 27 सांप्रदायिक घटनाएं हुर्इ थी। अगस्त तक 12 सांप्रदायिक घटनांए हो चुकी है कुल मिलाकर 39 घटनाएं हो चुकी है।
जहाँ उत्तर प्रदेश में देर रात में लोग घर से निकलने में डरने लगे है वहीँ लड़कियां भी दिन में सुरक्षित नही है। वही उत्तर प्रदेश में लूटपाट, डकेती, रेप, दंगे, तो अब आम बात हो गयी है। अपहरण जैसी वारदातें तो अब आम बात हो गयी हैं वही अखबारे लाऊड स्पीकर बजाने से लेकर कुत्ते द्वारा बकरी को भी काट लेने से आग भड़क जाती है। वही मुलायम के राज में राज्य अपराध प्रदेश था अब अखिलेश के राज में राज्य को दंगा प्रदेश के नाम से पहचान मिल रही हैं
वोट की राजनीति में लगे सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश में बारहवी पास छात्रों को करोड़ों के लैपटॉप वितरण कर रहे है। उन्होंने युवा वोट बनाने के साथ-साथ जाति पर भी राजनीति करने में कोर्इ कसर नही छोड़ रहे है। न जुमा का दिन ओर नही रोजा इफ्तार की पार्टी साम्प्रदायिक सौहार्द बनाने के लिए उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री ने पहल की।
9 सिंतबर को संवाददाताओं से बातचीत करने आये अखिलेश एक गोल सफेद जालीदार टोपी लगाए हुए थे। सदभाव स्थापित करने के एकतरफा दिखावटी के प्रयास की भी तीखी प्रतिक्रिया हो रही है। अगर टोपी लगाने से ही विश्वास लौटता है तो मुख्यमंत्री को तिलक भी लगाना चाहिए था। दोनो कामों का विश्वास लौटता। पहले मुलायम सिंह ने जिस तरह एक पक्ष का हौसला बढाया था तो उनके नाम के साथ मुल्ला शब्द जोड़ा गया। अब अखिल समाजवादी पार्टी के अखिलेश ने समाजवादी पार्टी को नमाजवादी पार्टी बना दिया।
प्रदेश में शासन व्यवस्था शुरू से ही लड़खड़ाने लगी है। इसका मुख्य कारण है कि उत्तर प्रदेश की पुलिस की कमान ऐसे लोगो के हाथ में दी गयी जिनमें योग्यता ही नही थी। डेढ़ साल के कार्यकाल में अखिलेश सरकार को लेकर धारणा यही बनी रही है। कि उसमें कर्इ पावर सेंटर है। जिनकी वजह से अखिलेश अपना सही निर्णय नही ले पाते।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए अखिलेश हद से ज्यादा दबाव में थे और उनके बराबर में खड़े आअज्म खान उनके जवाबो को सही कर रहे थे । राज्यपाल बी.एल जोशी ने अपनी रिर्पोर्ट में साफ लिखा है कि 10 दिन तक मुजफ्फरनगर सुलगता रहा। सरकार कुछ न कर सकी। सिर्फ तमाशा देखती रही। सरकार ने हर दर्जे की लापरवाही बरती । यह रोकने के लिए अखिलेश अपना निर्णय ले लेते तो घटनाओं को रोकने में कामयाब हो सकते थे ।
अनमोल जैन
छात्र -- तृतीय सेमेस्टर
पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग

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